
- Poetry : कभी “बर हो तो सही”
- Poetry : हिचकी ( An attempt to hold ) “याद तेरी थी यार मेरे”
- Poetry: ज़हमत ( To Bother ) “बदल ज़ुबां समझाएं क्या”
- Poetry : आदत ( Habbits ) “थमें पाथिक जो अलसाए”
- Poetry: तो बात हो! (self-righteous) “थोड़ा दिल खोलो तो बात हो”
- Poetry: फिर कहूं ! (Contemplation) “सूरज की टिकी नज़र हटा दूं ज़रा ..!”
- Poetry: आईना (mirror) “वो भी आवाज़ लगा रहा था !”
- Poetry: तनहाई (Solitude) ‘तुम क्यों हो यहां ?’
- Poetry: तू आया (when you came) ‘फिर नज़रों ने बहकाया !!’
- Poetry: समझ ( understanding ) ‘क्या समझकर हों रिहा !!’
- छलावा. ‘और कितना उलझेगी!’
- निवेदन. ‘रह जाओ दिल में हे हृशिकेश्वर !!’
- तू मत आना. ‘कि मेरी नज़र अब ढूंढे सहर नयी’
- तूने देखा तो होगा. ‘तेरे नाम का एक और कारवां’
- सांझ “उगता है सूरज दूर कहीं !”
- मायूसी. “वक़्त नहीं है तेरे पास”
- क्या कहें !! “बेज़ुबां सी ढूंढते अलफाज़ जो”
- इन्तज़ार. “..मैं भी करता हूं, तुम थोड़ा ज़ल्दि आना!”
- Poetry: झपकी (Slumber) “एक पंख हवा में है अभी”
- खिड़की. “रोज़ खुलने लगे थे परदे”
- मजाल “राख भरके रार की”
- Poetry: परछाई (Reflection) “मैं नहीं वो मैं नहीं”
You must be logged in to post a comment.