झपकी

मैं नींद में हूं , मुझे रहने दे ,
दो पल यूं ही बहने दे ..
क्या पूछे कोई मुझसे ,
अपना क्या, पराया क्या,
दुनिया में कमाया क्या,
छूटा क्या, मिटाया क्या,
हमको रास आया क्या,
मैं नींद में हूं , मुझे रहने दे..

जागेंगे तो फिर देखेंगे,
सूरज क्या , चांद क्या
बादलों की चाल क्या,
बारिश के अरमान क्या,
लहरों की सुर ताल क्या,
रंगो का हाल क्या,
इनसे अपना फिलहाल क्या,
मैं नींद में हूं , मुझे रहने दे..

पागलपन ये मेरा है,
लोगों पर इल्ज़ाम क्यों,
दर्द जो सारे मेरे हैं,
करूं किसी के नाम क्यों..
मैं भी इन्हें संभालूं क्या,
रख चौखट , राह निहारूं क्या,
भर नज़र , नज़र उतारूं क्या,
इनको भी मुझसे बरहाल क्या,
मैं नींद में हूं , मुझे रहने दे..

भूलूँ गर रस्ता अपना,
ना याद दिला अब यार मेरे,
ले डूबे मुझको सारे
मिलकर ये आज़ार मेरे..
एक धुन कान में नाचती है
फिर देर तक मुझमें जागती है ,
एक पंख हवा में है अभी
मेरे हाथों से दूर कहीं ,
रात तो वो गुज़र चुकी
जाहिर हैं लेकिन चांद कई ,
मैं नींद में हूं , मुझे रहने दे
दो पल यूं ही बहने दे …

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