तू मत आना कि अब कोई आरज़ू मुझको नहीं
तू मत आना कि हम मिले थे ना मिलेंगे कभी
तू मत आना कि सावन की बूंदों में असर नहीं
तू मत आना कि मेरी नज़र अब ढूंढे सहर नयी
तू मत आना कि दे ना तुझे इल्ज़ाम ये सबा कोई
तू मत आना कि ढल ना जाए ये रात भी अभी
तू मत आना कि मेरा दिल देता तेरी गवाही नहीं
तू मत आना कि मेरा ज़हन मझसे ना रूठ जाए कहीं
तू मत आना तोड़ने वो रिश्ता जो कभी था ही नहीं
तू मत आना जोड़ने वो सिलसला जो कभी टूटा नहीं
तू मत आना कि फिर कोई तम्मना भुला देगी मुझको
तू मत आना कि फिर तेरी हसरत जला देगी मुझको
तू मत आना कि लौट आएंगे गिले शिकवे सारे
तू मत आना कि टूट जाएंगे सब्र के किनारे
तू मत आना कि मुझे खुद से शिकायत ना हो जाए
तू मत आना कि कहीं फिर मुहबबत ना हो जाए
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