कितने घर जले तेरे नाम पे
तूने देखा तो होगा
फिर दर खुले तेरे नाम के
तूने देखा तो होगा
वो जहां सुना है तू
पहले ज़मीं पर आया था
वो ज़मीं जिसपर तूने
अपना महल सजाया था
मचा ज़मी पर वहीं कहर
वहीं से उठी शीत लहर
बदलती हुक़ूमत का असर
तूने देखा तो होगा
लहू हुए उस ज़मीं पे सर
तूने देखा तो होगा
तेरे नाम के टूटे वो पत्थर
तूने देखा तो होगा
वहीं बने तेरी इबादत के घर
तूने देखा तो होगा
फिर सजा सितारों से महल
तूने देखा तो होगा
मिलता तो तू नहीं
यूं कभी किसी को कहीं
ढूंढते फिरते हैं लेकिन
ओढ़े केसर के रंग कई
किसी ने जला दिया तुझे
कि तुझे मानता नहीं
रंग देकर हरा तुझको
कहता है तुझे जानता नहीं
बदलते रंगों की रवानियों में
तूने देखा तो होगा
किसी जोश की बिगड़ी जवानियों में
तूने देखा तो होगा
बदलते दौर की बदली कहानियों में
तूने देखा तो होगा
इन जलते दियों की अज़ानियों में
तूने देखा तो होगा
मेरा दिल भर आया है
कि तू फिर ज़मी पर आया है
किसी पत्थर को तराशकर
फिर अपना चहरा बनाया है
हम यूंही तुझे
सूरज की निगहों में देखते थे
खिलते फूलों में
बहती हवाओं में देखते थे
इस बार भी दीवारें मगर
खूबसूरत बहुत हैं
वो नया अपना मकां
तूने देखा तो होगा
ज़मीं पर तारों का सामां
तूने देखा तो होगा
तेरे नाम का एक और कारवां
तूने देखा तो होगा
बदला फिर तेरा आसमां
तूने देखा तो होगा!!
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