
एक हिचकी ज़ोर से आयी कल
कुछ तो याद आया उस पल
हमने भी रोका नहीं
ज़रा उसको टोका नहीं
सांसें रोकीं ना पानी पिया
ना हिचकी में तेरा नाम लिया
छूट जाती गर वो मुझसे
फिर रात भला कैसे सहते
याद तेरी थी यार मेरे
ऐसे कैसे जाने देते
एक आंसू यूं ढलका कहीं
देकर मझको दुहाई तेरी
गालों को सहलाते हुए
छूकर होठों के सिरे
चुप चाप सा बैठा रहा
फिर भी कुछ कहता रहा
देर तक मुसकाए हम
संग तेरे बहते बहते
याद तेरी थी यार मेरे
ऐसे कैसे जाने देते
सारी धुने कान में नाचीं वो
साथ तेरे थीं बांटीं जो
वो धुनें आज भी बहती है
आस पास ही रहती है
लाए बटोर के उनको सब
किया सिरहाने तुमको जब
गुनगुनाते रहे तुझे
सांसों के ठहते ठहते
याद तेरी थी यार मेरे
ऐसे कैसे जाने देते
~ ऋha
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