यूं हो रिहा !!

ख़्यालों की बंदिश

Riha

  • कुछ कहें ना कहें , क्या कहें!कहने को ना हो कुछ अगर ,फिर भी कहें , क्या कहें! बारिश बन गिरा है अभी ,कुछ मिट्टी में मिला है अभीबादल टूटें हैं कहींया ख़्वाब बूंद हुए सारेइन बूंदों में रहें, ना रहें , क्या कहें! ये रस्ते भी लेकर तो जाते नहीं कहींहमसे मिलने भी ये… Read more

  • इन्तज़ार

    देर कर दी तुमने आने में,मेरे जाने का वक़्त हुआ!रुक जाते कुछ पल मेरे लिए,मेरा लहज़ा भी सक्ख्त हुआ!सुनकर ये मासूम शिकायतसूरज थोड़ा सा मुसकाया,बोला रे पागल इन्सानमैं कब था तेरे लिए आया..दिल मेरा मायूस हुआ,उसकी चमक भी भर आई,हर शेह ने कुदरत की मुझकोयूं मेरी हकीकत समझाई.. क्यों वो बरसों का जागामेरे लिए रुक… Read more

  • झपकी

    मैं नींद में हूं , मुझे रहने दे ,दो पल यूं ही बहने दे..क्या पूछे कोई मुझसे ,अपना क्या, पराया क्यादुनिया में कमाया क्या ,छूटा क्या, मिटाया क्या,हमको रास आया क्या..मैं नींद में हूं , मुझे रहने दे जागेंगे तो फिर देखेंगे,सूरज क्या , चांद क्याबादलों की चाल क्या,बारिश के अरमान क्या,लहरों की सुर ताल… Read more

  • खिड़की

    खिड़की सी ये ज़िन्दगी,परदों में सिमटी सी,परत दर परत परदे खुले,कुछ नये यूं रिश्ते जुड़े.. एक दिन खोला परदा थोड़ाएक पत्ता नज़र आया थाबहुत देर तक उस पत्ते को,अपना हाल सुनाया थारोज़ मिलने लगे थे उससेरोज़ खुलने लगे थे परदेदुनिया लगी हंसीन कुछ,अब तक क्यों छुपाया थाउस पत्ते में ही सिमटा साफिर, दिल ये नज़र… Read more

  • मजाल

    आशिकी दर आशिकी , मैं ढूंढता खुद को फिराफ़ुरसतें बेज़ार सी , मैं मांगता खुद से फिराना नज़र , ना ज़र , ना कोई आसमा , ना रास्तामुफ़लसी की भीड़ थी , मैं भागता खुद से फिरा आज़माने आए जो वो आज़मा भर रह गएदिललगी करते परिंदे दिल लगा कर रह गएरख गए दहलीज़ पर… Read more

  • परछाई

    झांकती है आइने की,आखरी परत तक रूह मेरी,दिखता नही उसको कहीं,दूर तलक मुझसा कोईहै चढ़ी मुझपे परत,गुज़रे कई तूफान की,बिखरी पड़ी उसमें कहीं,पत्तियां कुछ याद सीहस्ती मेरी पानी कहीं,कहीं पुरानी शराब सीधुल रही खुद में ही,जाने क्यों बेबाक सी है चढ़ा जुनून सा,तोड़ता है आईने,टुकड़ो मे भी कहीं,मैं मिला उसको नहींदेखता जो तू मझे,मैं नहीं… Read more